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Archive for May, 2010

तुम जो नहीं… तो सुबह भी रात की रुसवाई सी लगती है…! यूं तो लोग अपने बहुत हैं…, पर तुम बिन सब दुनिया पराई सी लगती है…! नदी का पर्वत से जुदा होकर सागर में मिलना…, भी अब तो बेवफाई सी लगती है…! तुम जो नहीं… तो सुबह भी रात की रुसवाई सी लगती है…! [...]

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